सोअदगर कथा संग्रह अछि 'जिद्दी' - मिथिमीडिया
सोअदगर कथा संग्रह अछि 'जिद्दी'

सोअदगर कथा संग्रह अछि 'जिद्दी'

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की भेलै, मम्मी ? कोनो पहाड़ टूटि गेलै, कथिलए दुखित छेँ. ककरो मृत्यु भऽ गेल छै. हम डाक्टर लग जाइत छी, एक घण्टाक बात अछि, बस्स सभ किछु नरमल. जिद्दी कथाक नायिका गिन्नी द्वारा बाजल गेल ई वाक्य आजुक आधुनिकताक नाम पर सिगरेट, दारू आ यौन सम्बन्ध कें फैशनक रूप मे अपना रहल समाजक युवक-युवतीक कथा-व्यथा कें कथाकार सुजीत कुमार झा बेस सरल तरीका सँ प्रस्तुत कएने छथि. २०६९ साउनक अन्तिम सप्ताह मे बिमोचित पत्रकार आ साहित्यकार सुजीत झा केर तेसर कृति जिद्दी कथा-संग्रहक १२ गोट कथा बहुत रोचक आ जिज्ञासु अछि. ओना हुनक पहिल कृति चिडैं सेहो बेस रोमांचक अछि. एकटा साहित्यक विद्यार्थीक नजरि सँ सुजीत मिथिला समाज मे व्याप्त पौराणिक परम्परा सँ लऽकऽ आधुनिकताक छोट-छोट विषय सभ कें अपन कलमक माध्यम सँ सुसज्जित करय मे सफल छथि.
लाल डायरी आ जिद्दी कथाक कथ्य आ शिल्प गजब अछि. जिद्दी कथा संग्रहक पहिल कथा 'फूल फुलाइएकऽ रहल' मे जाहि तरहें नायिका अपना आगू आएल समस्याक समाधान कयलक अछि एहि समाजक महिला सभक लेल एकटा उपदेश अछि. दोसर कथा 'नव व्यापार'क महिला क्लब आ साधना कें अपना परिवार मे रहिकऽ एतेक बेसी स्वतन्त्रता मैथिल समाज मे जुनि  भेटैक. तहिना तेसर कथा 'खाली घर' आइ -काल्हि अपना कें आधुनिक बुझनिहार महिला जिनका अपने निर्णय सँ पछतावा होअय, ताहि स्थिति कें कथाकार चित्रण करए मे सफल भेल छथि. चारिम कथा 'लाल डायरी'. मुदा जतेक सत्य अछि यादवजी कें मृत्यु १७ गते भेल अछि, ओतबे निर्विवाद सत्य अछि फागुन १८ गते सांझ हमरा घर पर यादवजीक आएब जकर प्रमाण लाल डायरी अछि. वाक्य झकझोरि देइत अछि आ लगैत अछि वास्तव मे आदमी कें शरीरे मरैत अछि आत्मा नहि. विज्ञान युग मे सेहो एहि बातक एहसास कराओल गेल अछि. एकर प्रस्तुति एहि मे सजीवता आनि देने अछि. तहिना पांचम कथा जिद्दी प्रत्येक परिवारक माता पिताक अपना धियापुता कें देल जाएवला स्वतन्त्रता कें सँग-सँग हुनका प्रति आओर जिम्मेवारीक उपदेश देइत अछि. सुजीतक जादूक ओ सामान बेचनिहार युवती वास्तव मे सम्मोहित करैत अछि. सातम कथा आदर्श कोनो खास प्रभावित नहि करैत अछि. मुदा अर्थहीन यात्रा मे नेहा, जिनकर व्यक्तित्व एक चुम्बक जका छलनि  कोनो पुरुष स्वयं खिचाक चलि अबैत छल ताहि कें ओ मात्रे नहि समाजक बहुतो नेहा सभ दुरुपयोग करैत छथि. जाहि कारणें हुनक वैवाहिक जीवन अस्वस्थ रहल. ई मात्र  कथे नहि समाजक ऐना अछि.
व्यर्थक उडानक सम्बन्ध मे एक्कहिटा बात कहब जे सुजीत मानव जातिक ओ उड़ान जे बहुत कम समय मे बहुत बड़का होइत छैक, जे बहुत थोर लोक बुझि सकैए  ताहि कें अत्याधिक चतुरताक संग प्रस्तुत कयल गेल अछि. नवम कथा मे नीमा द्वारा अपना पति सोहनक लेल कएल गेल व्यवहार पर जेना श्रीनाथ चिन्तित छलथि, हमरो मोन मे स्याह प्रश्न आएल कि सोहनक पत्नीक व्यवहार निष्ठा छल कि देखावा ? संग्राहक एगारहम कथा केहन सजायक चमेलीक प्रश्न - कोन अधिकार सं ओ हमरा पोसलनि आ फेर हमरा जनसागर मे भंसा देलनि, हम जन्म सँ अनाथ छी , ओतहि  पलितहुँ एहि गन्दा वातावरणक असरि तऽ नहि पडितए. हमर विश्वास किए तोड़ल गेल ? प्रश्न मात्रे चमेलीक नै भऽ समाजक प्रत्येक बच्चाक अछि, जे पोसपुत वा सतवा माता पिताक संग रहैत  छथि आ दुःख भोगैत छथि. अन्तिम कथा मेनकाक हमर हृदयसं धन्यवाद अछि. की आब तऽ अहूँ नीना बनि गेल छीक जवाब नहि ओ चिचएलीह आ एकटा सुखी परिवार विध्वंश होबए सँ बचि गेल.
समग्र मे जिद्दी कथा संग्रह मैथिली पाठकक हेतु नीक कृति अछि. किताबक प्रिन्टिङ्ग, डिजाइन सेहो बढिया अछि. 
समीक्षा: विजय मस्त

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