ककर दोष ??

सन् सैतालिस मे
अंग्रेजी दुशासन सँ
अंग्रेजक कुशासन सँ
देश भेलै आजाद,
सुराजक सपना 
लगलै सभकेँ
जेना भऽ गेलै साकार ।

पन्द्रह अगस्तक
सूर्योदय काल मे
जे पसरल रहै अरुणाभा
सगरो विश्व मे
ओकरा मानल गलै 
लालकिला पर फहराइत 
तिरंगाक केसरिया
भागक प्रतिछाया ।

गाँधीक वचन-कथन
सत्य-अहिंसाक प्रति हुनक समर्पण
तिरंगाक दोसर रंग
श्वेत भाग के 
बेस अलंकृत करैत रहैक ओहिदिन ।

हिमालय सँ कन्याकुमारी धरि
गंगा-यमुना-कृष्णा-कावेरी
केर कोरा मे 
खिलखिलाइत घर-दलान
लहलहाइत खेत-खरिहान
सामाजिक-सांस्कृतिक-समृद्धिक प्रतीक
तिरंगाक तेसर रंग 
हरियर सन बुझाइत छलै सभकेँ ।

राष्ट्र ध्वज के मध्य मे
पारल चक्र पर
हाथ धऽ सभ सपथ खयने रहय
जे समयक संग सदिखन चलत
आ' अपन पौरुष्य,आपसी सद्बाव सँ
प्रगति पथपर आगाँ बढ़त ।

मुदा,लगले
एहि पहियाक तिल्ली सभ
हुअए लगलै बेलागि
आ'कच्ची सड़क पर
लसक' लगलै ठाम-कुठाम
तथाकथित प्रगतिवादी
अंग्रजीया नीति केँ लधने
कटहीगाड़ी ।

गाँधीवादी आ' गाँधीक सुराज
अपने देशमे
तेसर दर्जा मे 
सफर करबा लेल विवश भऽ गेल ।

पश्चिमक कृत्रिम चकाचौंध मे
पुरबा बसातक पाँखि चढ़ल
अरुणोदयक लाली
ककरो नजरि नहि अबैत छैक आब
किएक तऽ आबतऽ
ग्रामवासिनी भारत माता
सेहो परदेशे बसैत छथि
फेर मशीनक गड़गड़ाहटि
आ' धूआँ भरल आकाश मे
मुरगाक बाञ्ग आ' 
सुरूजक लाली के
श्रवण-दर्शन कोन विधि हो ?

आइ पैंसठि बरखक बाद
देश भरि मे व्याप्त आतंक
सामाजिक द्वेष-राग
राजनैतिक दिशाहीनता
नीतिविहीन सरकार
भ्रष्ट शासन-प्रशासन
सँ त्रस्त आमजनमानस
मे जौँ ककरो-कखनो 
बुझाइत छैक जे 
ई अर्ध-अंगरेजिया राज सँ नीक
अंगरेजे केर राज छेलैक 
त' एहि मे ककर दोष ??

— चन्दन कुमार झा 

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